Chapter 17

  • भूखे प्यासे मन के संग- Hindi Poem

    भूखे प्यासे मन के संग मैं बात करुँ क्या परिवर्तन की अन्न बना भगवान हमारा तप का लक्ष्य है प्यास बुझाना अभिलाषा कष्टो के पथ पर सोती लेकर आश का सपना छिन्न भिन्न हो जाती निदियां सपना या दर्शन रोटी का भूखे प्यासे मन के संग …   …   …  ….  …  …  … पवन…

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  • तुम अँधेरी रात लाओ मैं सजाऊ दीपमाला

    तुम अँधेरी रात लाओ मैं सजाऊ दीपमाला तुम करो बाधा उपस्थित मैं कहूँ उसको सुअवसर शाप का स्वागत करू मैं माँग कर वरदान सुन्दर मैं उतारू आरती तुमको बनाकर यज्ञशाला मृत्रिका के पात्र लघु में वर्तिका – लघु स्नेह थोड़ा पर तुम्हारी रात से मैंने किस विधि नेह जोड़ा कम न अब सुख के…

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  • ओ मेरे सूर्यमुखी संबोधन – Poem

    ओ मेरे सूर्यमुखी संबोधन कब तक यूं अनसुने रहोगे ? एक सुखद भोर की प्रतीक्षा में कब तक यूं तिमिर ही पियोगे ? सारे संबंध प्यास के मरुस्थल की झील हो गये सारे संदर्भ प्यार के नभ के कंदील हो गये ओ मेरे गीतमुखी आवाहन कब तक बन अजनबी फिरोगे ? महुए के तन…

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  • याद अभी भी शेष है

    पिया तुम्हारे प्रथम प्यार की याद अभी भी शेष है मन में। मौसम जब भी करवट बदले सावन आस जगाये मन में। मुझे याद है प्रथम प्यार वो दो नयना जब टकराये थे। बिजली कौंध गयी थी मन में तुम हमें देख मुस्काये थे। पिया तुम्हारे प्रथम प्यार की याद अभी भी शेष है…

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  • अनेकों प्रश्न ऐसे हैं, जो दुहराये नहीं जाते – बलबीर सिंह ‘रंग’

    अनेकों प्रश्न ऐसे हैं, जो दुहराये नहीं जाते। मगर उत्तर भी ऐसे हैं, जो बतलाए नहीं जाते। इसी कारण अभावों का सदा स्वागत किया मैंने, कि घर आए हुए, मेहमान लौटाए नहीं जाते। हुआ क्या आँख से आँसू अगर बाहर नहीं निकले, बहुत से गीत भी ऐसे हैं जो गाये नहीं जाते। अनेकों प्रश्न…

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  • क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल – रामधारी सिंह “दिनकर

    क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल सबका लिया सहारा पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे कहो, कहाँ, कब हारा? क्षमाशील हो रिपु-समक्ष तुम हुये विनत जितना ही दुष्ट कौरवों ने तुमको कायर समझा उतना ही। अत्याचार सहन करने का कुफल यही होता है पौरुष का आतंक मनुज कोमल होकर खोता है। क्षमा शोभती उस भुजंग को…

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