भूखे प्यासे मन के संग मैं बात करुँ क्या परिवर्तन की
अन्न बना भगवान हमारा तप का लक्ष्य है प्यास बुझाना
अभिलाषा कष्टो के पथ पर सोती लेकर आश का सपना
छिन्न भिन्न हो जाती निदियां सपना या दर्शन रोटी का
भूखे प्यासे मन के संग … … … …. … … …
पवन है पेय पदार्थ हमारा धूल बनी है खाद्य हमारा
निर्वस्त्री सन्यासी सा जब दिशा बनी है वस्त्र हमारा
पथ का कोना रवा बनी जब फ़िक्र हमें क्या अन्य विलप की
भूखे प्यासे मन के संग मैं बात करुँ क्या परिवर्तन की
मैंने प्रेम का ग्रंथ बिखेरा तपते सूखे जग कानन में
आर्द्र बनाने को बरसाया प्रेम बूँद सूखे पावस में
फिर मधुरित में रोती है क्यों आकुल आत्मा हर प्राणी की
भूखे प्यासे मन के संग मैं बात करुँ क्या परिवर्तन की
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