पिया तुम्हारे प्रथम प्यार की
याद अभी भी शेष है मन में।
मौसम जब भी करवट बदले
सावन आस जगाये मन में।
मुझे याद है प्रथम प्यार वो
दो नयना जब टकराये थे।
बिजली कौंध गयी थी मन में
तुम हमें देख मुस्काये थे।
पिया तुम्हारे प्रथम प्यार की
याद अभी भी शेष है मन में।
रात बड़ी थी खिली हुई सी,
तन्हाई ने दी थी दस्तक।
कैसे आज भुला दू मैं
सुखद अनुपम प्रथम स्पर्श वो
पल भर को तो चौंके थे तुम
सुधिया भी बिसराये थे।
मन का मन से हुआ मिलन जब
हम आँचल में शर्माये थे।
पिया तुम्हारे प्रथम समर्पण की,
याद अभी भी शेष है मन में।
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