मैं नारों से ज़रा उकता गया हूँ,
करारों से ज़रा उकता गया हूँ Ι
मैं गिरता हूँ, तो गिरने दो मुझे अब,
सहारों से ज़रा उकता गया हूँ Ι
कोई दुश्मन मिले तो बात हो कुछ,
मैं यारों से ज़रा उकता गया हूँ,Ι
शहर ! तुझमें खिजां बाकि नहीं क्या ?
बहारों से ज़रा उकता गया हूँ,Ι
ख़फ़ा हो तो, मुझे खुल कर के कह दो,
इशारों से ज़रा उकता गया हूँ,Ι
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