मैं नारों से ज़रा उकता गया हूँ – Gazal

मैं नारों से ज़रा उकता गया हूँ,
करारों से ज़रा उकता गया हूँ Ι

मैं गिरता हूँ, तो गिरने दो मुझे अब,
सहारों से ज़रा उकता गया हूँ Ι

कोई दुश्मन मिले तो बात हो कुछ,
मैं यारों से ज़रा उकता गया हूँ,Ι

शहर ! तुझमें खिजां बाकि नहीं क्या ?
बहारों से ज़रा उकता गया हूँ,Ι

ख़फ़ा हो तो, मुझे खुल कर के कह दो,
इशारों से ज़रा उकता गया हूँ,Ι

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