बिना टिकट के – हिंदी व्यंग

ट्रेन में बैठते ही टीटी ने चारों तरफ नजर दौड़ाई,
कोने में बैठे युवक को देखकर उसे १०-२० मिलने की आस नजर आयी।
वह लपककर युवक के पास पहुंचा बोला ‘टिकट प्लीज’
उसे देखकर युवक घबराया बोला ‘जी मैं अजीज’ ।

अबे तेरा नाम नहीं टिकट पूछा है,
टिकट ना हो तो अंदर करने की सोचा है।
युवक के बिखरे हुए बाल पिचके हुए गाल,
और फटे हुए कपड़े बता रहे थे उसका हाल।

जेल जाने की बात सुनकर युवक घबरा गया,
उसे अपनी ही गरीबी पर तरस आ गया।
परेशान भाई, बीमार माँ, बूढ़ा बाप याद आ गया,
यह सब सोचकर उसकी सूनी आँखों में पानी आ गया।

तभी टीटी ने उसका कॉलर पकड़ कर हिलाया,
और कुछ पैसे देने को धमकाया।
युवक की असमर्थता पर टीटी बुरी तरह चिल्लाया,
अचानक ही युवक को भी गुस्सा आया।

वह बोला चिल्लाइये मत शांत हो जाइये,
जेल ले जाना हो तो शौक से ले जाइये।
यदि जानना चाहते हैं तो मेरी मजबूरी जानिए,
पर कम से कम रिश्वत तो मत मांगिये।

आप क्या समझते हैं कि मैं अनपढ़ जाहिल गवार हूं,
जी नहीं मैं शिक्षित बेरोजगार हूँ।
एम. ए. फर्स्ट क्लास हूँ,
एल. एल. बी. भी पास हूँ,
नौकरी का इंटरव्यू देने जा रहा हूँ,
पर टिकट ना ले सका गरीबी का मारा हूँ,

वकालत का रजिस्ट्रेशन है पर काला कोट नहीं सिला पाया,
आप टिकट की बात करते हैं, मैंने तो कल से खाना भी नहीं खाया।

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